सा विद्या या विमुक्तये ।


That is knowledge which liberates

तत्कर्म यन्न बन्धाय,
सा विद्या या विमुक्तये ।
अनायासाऽपरं कर्म,
विद्याऽन्या शिल्पनैपुण्यम ॥
।।१-१९-४१॥
( विष्णुपुराणे प्रथमस्कन्धे एकोनविंशति अध्याय: )
( कर्म वही है जो सीमाओं में बँधा न हो । विद्या वही है जो हमें मुक्ति प्रदान करे ।
शेष सभी कर्म अनायास प्रयास मात्र है । शेष सभी विद्या शिल्प या निपुणता मात्र है )
[ That is action which does not promote attachment; that is knowledge which liberates.
All other action is mere pointless effort; all other knowledge is merely craftsmanship or skill ]

सुभाषितानि Subhaashitani

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